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देवताओं की परछाई नहीं होती: ब्लागर

देवताओं की परछाई  नहीं होती: ब्लागर


देवताओं की परछाई  नहीं होती: ब्लागर

 देवताओं की परछाई नहीं होती: ब्लागर नमस्कार दोस्तों आज मैं आप लोगों को इस कहानी के बारे में बताने वाला हूं। 

यदि आप इस प्रकार की कहानी सुनने एवं उसके अत्यधिक रसिक हैं तो यह पोस्ट आपके लिए है।

धार्मिक बातें सुनने से किसी का भी मन कुछ क्षण के लिए थोड़ा बहुत  परिवर्तित हो जाता है।
अगर शब्द कानों में गूंजने लगें तो मन में बदलाव एवम् विचार धारा  निर्मल  हो जाती है।

कुछ ऐसे शब्द जो  मन के शीर्ष बिंदु पर चोट कर देते हैं। और अंततः किसी समय उनको परखने का ख्याल मन में आ जाता है।

इस विषय में एक प्राचीन किस्सा प्रचलित है।

एक समय लुटेरों का एक बहुत बड़ा दल था। उस दल का महानायक अपने साथियो का निरीक्षण बड़ी मुस्तैदी से किया करता था।

 उन्हें समझाइश भी देता था एवं अपने नियम का कड़ाई सेे पालन भी करवाता था।
 आज्ञा का पालन नहीं करने पर  बहुत ही कठोर सजा भी सुना देता था।

 देवताओं की परछाई एक रहस्य।



चोरों के नायक ने सभी चोरों को धार्मिक बातें सुनना एवं धार्मिक स्थल से गुजरना सख्त मना कर रखा था।  इस संबंध में सख्त निर्देश जारी किए गए थे।
 यदि कोई इसका उल्लंघन करता है तो उससे मृत्यु दंड की सजा दी जाएगी।
एक चोर ने सरदार से पूछा- सरदार जी कारण वश यदि उसी जगह से निकलना पढ़े तो क्या करना चाहिए।
हूूजूर धार्मिक बातें तो सुनाई ही पड़ेगी। 
 इसके लिए क्या उपाय है।

 सरदार ने कहा- अपने कानों को गमछे से अच्छी तरह बांध लें और तेजी से वहां से भाग निकले। इसलिए कोई भी शब्द नहीं सुनाई देगा। तब सभी चोरों ने कहा ठीक है ऐसा ही करेंगे।

चोरों का सरदार जानता था, अगर किसी चोर साथी ने धार्मिक बातों को सुन लिया तो चोरी करना छोड़ देंगे और सारा काम नष्ट हो जाएगा।

एक बार एक चोर को जिस रास्ते से जाना था। उसी रास्ते में एक देव मंदिर था और वहां पर कोई अनुष्ठान चल रहा था। 

एक  महात्माजी श्रद्धालुओं को धार्मिक प्रवचन सुना रहे थे।
संध्या का समय था कुछ थोड़ा-थोड़ा  अंधेरा छाने के कारण रास्ता साथ नजर नहीं आ रहा था।
वह दूर खड़ा मन में विचार करने लगा की अभी किसी प्रकार का संबोधन मुझे सुनाई नहीं दे रहा है।
 अतः नजदीक जाने से कुछ ना कुछ धार्मिक वाक्य अवश्य सुनाई देंगे। इसलिए उसने अपने कानों को कसकर बांधा और बहुत तेजी से भागा।

संयोग वश उसने जी जान से दौड़ लगाई। रास्ते में उसे इस प्रकार का कांटा चुभा की वह लडखडाकर गिर गया और दर्द से कराहने लगा।

 कांटे को खींचने के कारण उसके कानों से बंधा हुआ गमछा छूट गया, और उसी समय महात्मा जी ने कहा- प्रिय श्रोताओं में एक गूढ़ाँर्थ बात आप लोगों को बता रहा हूं, की देवताओं की कभी परछाई नहीं होती है। इसको याद रखना, वह शब्द उस चोर के कानों में गूंजे, देवताओं की कभी परछाई नहीं होती है।
वह मन में सोचने लगा कि मैंने इतना तो सुन लिया है उसने कानों को फिर बांधा और उसी गति में वह दौड़ने लगा।

उसने यह बात किसी को नहीं बताई हर पल उसकी अंतरात्मा में वह शब्द गूंजते रहते थे की देवताओं की कभी परछाई नहीं होती है।
गांव के बाहर एक देवी मंदिर था चोर हमेशा की तरह चोरी जाने से पहले मंदिर में प्रार्थना किया करते थे, कि हमें आज बहुत सा धन हाथ लगेे।
किसी प्रकार का वाधा विघ्न नहीं आए हम आपको  ज्यादा बैठ चढ़ाएंगे। 
चोरी मैं जो कुछ माल मिलता उसे वे उसी मंदिर मैं आपस में बांट लिया करते थे। 
अर्ध रात्रि का समय था गांव का कोई चालाक व्यक्ति मंदिर मैं ना जाने किस नियत से घूम रहा था।
उसी समय चोरों का विशाल दल मंदिर की तरफ आता देख वह व्यक्ति डर के मारे देवी मूर्ति के पीछे छुप गया।

उस रात चोरों को बहुत सा धन हाथ लगा सभी ने अपना-अपना लूटा हुआ खजाना वहीं पर एकत्र करके रख दिया। लूट की वारदात को अंजाम देने वाली अपनी अपनी कार्यशैली का बखान करने लगे। और कल कहां जाना है इस बारे में भी चर्चा की और कुछ समय सुस्ताने  के लिए बैठे थे।

सभी अपनी अपनी  बातों में  अस्त व्यस्त थे। मूर्ति के पीछे छुपे हुए आदमी की तरफ किसी का ध्यान आकर्षित नहीं हुआ। अगर हुआ भी होगा तो किसी को यह ज्ञान नहीं था की यह परछाई मूर्ति की है या किसी व्यक्ति की उन्हें इसका कोई ज्ञान नहीं था।

 जिस चोर ने सुना था की देवताओं की परछाई नहीं होती है। अचानक उसकी नजर उस पर पड़ी परछाई को देखकर उसे महात्मा जी के प्रवचनों की याद आ गई। देेेेवताओं  की कभी परछाई नहीं होती है। उसे शंका हुई कि यहां पर कोई व्यक्ति छुपा हुआ है।

सभी चोर अपनी-अपनी गपशप मैं मस्त थे। लेकिन वह सोच रहा था की सरदार ने कहा था कहीं पर शास्त्र ज्ञान कथा वार्ता हो वहां पर कानों को बंद कर दौड़ लगाकर भाग जाना चाहिए। एवं धार्मिक बातों को नहीं सुनना चाहिए। 
हमारे सरदार की क्या मंशा है जो हमें ज्ञानवर्धक बातों से परहेज करने के लिए कहा करते हैं।
शायद हमने कभी परछाई पर ध्यान नहीं दिया हो।
वह तत्काल वहां पर गया देखा कि एक व्यक्ति वहां पर छुपा हुआ था।

उसे देख कर वह भौचक्का सा रह गया। एवं हृदय में अटूट विश्वास ने जगह बना ली। उसने संकल्प किया आज से यह काम नहीं करूंगा।
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